कोटा में कोटड़ी नहर में नाव पलटने से डूबे 4 युवकों के शव बुधवार सुबह निकाल लिए गए। शव मिलते ही बच्चों के जिंदा बचने की उम्मीद लगाए बैठे परिवार बिलख पड़े। हादसे में मरने वाले यश का 17 अक्टूबर को जन्मदिन था।

यश की तबीयत खराब होने के कारण जन्मदिन नहीं मनाया था। दोस्तों ने दशहरा के दिन पार्टी का प्लान किया था और उसकी तैयारी चल रही थी। विसर्जन के लिए वह नहर के अंदर नहीं जाना चाहता था, लेकिन साथियों ने बुला लिया।

राहुल को तैरना आता था, लेकिन साथियों ने बचने की कोशिश में उसे पकड़ लिया तो वह भी डूब गया। विकास की 3 महीने पहले ही लव मैरिज हुई थी। वो रिश्तेदार के घर आया था। युवकों को मूर्ति विसर्जन के लिए जाता देख साथ में चला गया था।

एडीएम विनोद कुमार ने बताया- प्रशासन की तरफ से प्रतिमाओं का विसर्जन करने के लिए करीब 5-6 पॉइंट बनाए थे और वहां पुलिस की भी व्यवस्था थी। जहां चारों युवक डूबे, वहां विसर्जन के लिए कोई पॉइंट नहीं था और पुलिस की निगरानी भी नहीं थी।

घटना में बचे दीपक ने बताया- सभी विसर्जन स्थल दूर थे, इसलिए संजय नगर से प्रतिमा लेकर केनाल रोड पहुंचे। यहां नहर के घाट पर आए। नाव वाले से बात की तो अवैध तरीके से विजर्सन के लिए राजी हो गया। 200 रुपए में बात तय की थी। विसर्जन के दौरान नाव का बैलेंस बिगड़ गया।


पानी के तेज बहाव से बिगड़ा नाव का बैलेंस

दीपक ने बताया- एक छोटी सी नाव में 7 लोग सवार थे। नाव नहर में करीब 100 मीटर अंदर गई थी। यहां मूर्ति को विसर्जन के लिए एक तरफ झुकाया तो पानी के तेज बहाव से नाव का बैलेंस बिगड़ने लगा। इस दौरान सभी लोग हड़बड़ा गए और नाव एक तरफ पलट गई।

दीपक ने बताया- जैसे ही नाव अनबैलेंस होने लगी मैं और मानकंवर (अन्य महिला) कूद गए और तैरकर घाट की तरफ आने लगे। हम घाट के पास पहुंचे तो बाहर खडे़ लोगों ने खींच लिया। हादसे में विकास वर्मा उर्फ सुमन (22), सूरज सिंह (22), यश उर्फ यशू जोशी (19) और राहुल जोशी (18) की मौत हो गई।


पिता की आंखों के सामने डूब गया बेटा

हादसे में मरने वाला यश रिफाइंड ऑयल टेस्टिंग लैब में काम करता था। यश अपने ताऊ के लड़के राहुल और पिता बबलेश के साथ प्रतिमा विसर्जन में गया था। बबलेश ने बताया- हम दोपहर करीब 3 बजे संजय नगर से प्रतिमा लेकर निकले थे।

घाट पर युवकों ने ही नाव वाले से बात की। इसके बाद युवक प्रतिमा को नाव पर चढ़ाने लगे। हम घाट पर दीवार पर बैठ गए। यश मेरे पास ही बैठा था। तभी दूसरे लड़कों ने उसे प्रतिमा को हाथ लगाने के लिए कहा। उसने नाव में जाने से मना कर दिया, क्योंकि उसे पानी से डर लगता था।

युवकों ने कहा- प्रतिमा को नाव में चढ़ाना है तो वह नाव में चला गया। सभी युवकों ने मिलकर प्रतिमा को नाव में चढ़ाया। इसके बाद नहर के 100 मीटर अंदर जाकर विजर्सन करना था। विसर्जन करते के दौरान नाव पलट गई। यह कहते-कहते बबलेश फफक पड़े। लोगों ने उन्हें संभाला।

बबलेश ने बताया- हम यहीं थे, मेरे सामने ही नाव पलटी थी। मैं बचाने के लिए चिल्लाता रहा, दोनों हाथ ऊपर किए थे। अन्य लोगों ने भी शोर मचाया और बचाने की गुहार लगाई, लेकिन कोई मदद को नहीं आया। मेरी आंखों के सामने बच्चा पानी में समा गया। यश इकलौता बेटा था।

राहुल के बर्थडे की पार्टी की तैयारी थी

मरने वालों में यश के साथ चाचा का लड़का राहुल भी था। राहुल 4 बहनों में इकलौता भाई था। राहुल के पिता महेन्द्र के भी आंसू नहीं थम रहे। उन्होंने बताया- बच्चे नाव में नहीं बैठना चाहते थे, लेकिन मूर्ति को नाव में रखने के चक्कर में सवार हो गए।

यश के दोस्त और सहकर्मी चंद्रप्रकाश ने बताया- 17 अक्टूबर को यश का जन्मदिन था, लेकिन उसकी तबीयत खराब होने के कारण काम पर नहीं आ रहा था। 1 दिन पहले हमारी बात हुई थी, तब हमने मंगलवार शाम को उसके बर्थडे की पार्टी का प्लान किया था।

हमने घर पर केक कटवाने और फिर होटल में खाना खाने का प्लान बनाया था, जिसकी तैयारी भी कर ली थी। हादसे वाले दिन दोपहर में करीब तीन-साढे़ तीन बजे कॉल किया तो यश ने कहा कि हम अभी विसर्जन के लिए आए हुए हैं। वापस आकर सेलिब्रेट करेंगे। उसके बाद शाम को जब कॉल किया तो पता लगा कि यश डूब गया है।


राहुल को तैरना आता था, लेकिन बच नहीं सका

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार- नाव पलटी तो चारों युवक उसके नीचे दब गए। जैसे-तैसे साइड में हुए, लेकिन बच नहीं सके। राहुल को तो तैरना भी आता था, लेकिन दूसरे लड़कों ने ये सोचकर उसे पकड़ लिया कि वह उनको बाहर निकाल लेगा। तेज बहाव और बचने की आपाधापी में राहुल हाथ-पैर नहीं चला सका और डूब गया।


शव देख बेसुध हुई पत्नी, बुआ की आंखें पथराई

हादसे में जान गंवाने वाले विकास की 3 महीने पहले ही लव मैरिज हुई थी। पति की लाश देख पत्नी किरण बेसुध हो गई। पत्नी बोली- इनकी जगह भगवान मुझे बुला लेता। विकास मंगलवार को ही पत्नी किरण के साथ खेड़ा रसूलपुर (रामपुर) से दशहरा देखने के लिए कोटा आया था। यहां रिश्तेदार से मिलने उनके घर संजय नगर आया था। इस दौरान मोहल्ले के युवक विसर्जन के लिए जाने लगे तो वह भी साथ हो गया।

इधर, सूरज का शव निकाला गया तब उसके पिता जगदीश और बुआ राधा मौके पर थे। लाश देख बुआ की आंखों में आंसू नहीं थमे। बार-बार सूरज पुकारती रही। दूसरे रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला। सूरज के शव को पोस्टमॉर्टम रूम ले जाया गया, लेकिन बुआ राधा बार-बार उसे याद कर रही थी। वह पथराई आंखों से घाट की तरफ देखती रही।


कोटा में कोटड़ी नहर में नाव पलटने से डूबे चार युवकों के शव 18 घंटे बाद बुधवार सुबह निकाल लिए गए। चारों के शव घटना स्थल से करीब 100 मीटर दूर मिले। NDRF और SDRF की टीमों ने आज सुबह 5:30 बजे दोबारा रेस्क्यू शुरू किया था। सबसे पहले विकास वर्मा उर्फ सुमन (22) और सूरज सिंह (22) के शव मिले।