आउटसोर्स भर्ती में बड़े सुधार की तैयारी:जेम पोर्टल से होंगे ओपन टेंडर, सीधे खाते में जाएगा वेतन

Updated on 11-03-2026 01:08 PM

मप्र के सरकारी विभागों और निगम-मंडलों में एक लाख से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी हैं। इनकी नियुक्ति, वेतन भुगतान आदि का जिम्मा निजी एजेंसियों के पास है। अक्सर आरोप लगते हैं कि एजेंसियां कर्मचारियों से मोटी रकम वसूलती हैं और सरकार से पूरा भुगतान लेकर भी उन्हें कम वेतन देती हैं।

इसे देखते हुए अब उद्योग एवं एमएसएमई विभाग ने ड्राफ्ट तैयार कर वित्त को भेज दिया है। इसके तहत आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल के जरिए ओपन टेंडर किए जाएंगे। प्रस्ताव जल्द कैबिनेट में लाने की तैयारी है।

इसके बाद किसी विभाग को सीधे एजेंसी चयन या नामित ठेका देने की अनुमति नहीं होगी। हाल के बजट सत्र में आउटसोर्सकर्मियों की समस्याओं को लेकर 10 बैठकों में 40 से ज्यादा सवाल उठे।

1 लाख आउटसोर्सकर्मी.. सेवा शर्तों में गड़बड़ी पर कई बार प्रदर्शन, इस बजट सत्र में लगे 40 से ज्यादा सवाल

नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों को फायदा, गड़बड़ी हुई तो कार्रवाई एजेंसियों के लिए जीएसटी, ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कानूनों का पालन अनिवार्य किया जाएगा। कर्मचारियों से कोई भी एंट्री फीस या कमीशन वसूली पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

वेतन का भुगतान सीधे बैंक खाते में होगा। न्यूनतम मानदेय से कम भुगतान नहीं होगा। शिकायत निवारण की व्यवस्था होगी और गड़बड़ी पाए जाने पर एजेंसी पर जुर्माना, ब्लैकलिस्टिंग और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा।

कई जिलों में सामने आ चुकी हैं शिकायतें

1. सीधी... साल 2023–24 में सीधी जिले में स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में नियमों को ताक पर रखने, मोटी रकम लेकर अपात्रों की नियुक्ति के आरोप लगे। मामला आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ तक पहुंचा।

2. ग्वालियर... 2024 में नगर निगम व अन्य विभागों के आउटसोर्स कर्मचारियों ने कई महीनों से वेतन और बोनस न मिलने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। इनका आरोप था कि एजेंसी को भुगतान के बावजूद उन्हें पूरा पैसा नहीं दिया गया।

3. बिजली कंपनियां... इनके आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा साल 2024 से आरोप लगाए जा रहे हैं कि एजेंसियां शोषण कर रही हैं। सरकार के स्तर पर नीति स्पष्ट नहीं होने के कारण हजारों कर्मचारियों का भविष्य खतरे में है।

जैम पोर्टल से क्या बदलेगा? जैम पोर्टल के जरिए टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। इसमें टेंडर शर्तें, सेवा प्रदाता का चयन, भुगतान और अनुबंध की जानकारी सार्वजनिक रहती है। कमीशन और बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी। अभी मप्र में एमएसएमई के अंतर्गत काम करने वाले सेडमैप के जरिए आउटसोर्स कर्मचारी लिए जाते हैं। इनके अलावा निगम-मंडल, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली कंपनी में आउटसोर्स पर कर्मचारी लिए गए हैं।

मंत्री बोले-जानकारी नहीं उद्योग एवं एमएसएमई मंत्री चैतन्य कश्यप का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी प्रस्ताव की जानकारी नहीं है, जबकि उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार ने कहा कि वे इस बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकते।



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