अंडरग्रेजुएट इंजीनियरिंग कोर्स में एडमिशन के लिए जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (IIT-JEE) देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक है। हर साल लाखों छात्र इंजीनियरिंग फील्ड में बेहतर करियर का सपना लेकर इस प्रवेश परीक्षा में बैठते हैं। हाल ही में IIT कानपुर के डायरेक्टर ने जेईई एडवांस्ड एग्जाम में बड़ा बदलाव की ओर इशारा किया है, जिसका लाखों छात्रों पर सीधा असर पड़ेगा।
जेईई एडवांस्ड में 3 चांस की मांग क्यों?
दरअसल, कोविड-19 महामारी के बाद से जेईई एडवांस्ड में अतिरिक्त मौका देने की मांग की जा रही है। क्योंकि कोरोना के कारण छात्रों की पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा था। तब आईआईटी प्रशासन ने असाधारण परिस्थतियों को ध्यान में रखते हुए 2020 और 2022 में कुछ प्रभावित छात्रों को जेईई एडवांस्ड में बैठने का स्पेशल तीसरा मौका दिया था।
हालांकि स्थिति सामान्य होने के बाद, यह नियम हटा लिया था। लेकिन तब से छात्र इसे स्थायी रूप से 3 मौके देने की मांग कर रहे हैं। हाल ही में 12000 से अधिक स्टूडेंट्स ने एक ऑनलाइन याचिका दायर की है, जिसके बाद से इस मामले ने फिर से तूल पकड़ लिया है। इस बीच आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर ने जेईई एडवांस्ड के अटेंप्ट को लेकर अहम जानकारी दी है।
IIT कानपुर के डायरेक्टर ने दी अहम जानकारी
IIT कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी वाले एक कार्यक्रम में कहा कि आने वाले वर्षों में JEE एडवांस्ड में बदलाव हो सकता है, क्योंकि ऐसी मांगें उठ रही हैं। 'द इंडियन एक्सप्रेस' द्वारा परीक्षा के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर, अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल कोई बदलाव करने की योजना नहीं है, लेकिन 'अगले कुछ वर्षों में' इसमें बदलाव किया जा सकता है।
जेईई एडवांस्ड में बड़े बदलाव की जरूरत क्यों?
उन्होंने ने कहा कि JEE एडवांस्ड अब 'पूरी तरह से कोचिंग पर निर्भर' हो गया है और इसमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने बताया कि कोचिंग पर निर्भरता को कैसे कम किया जाए, इस पर चर्चा चल रही है। तीसरे प्रयास (third attempt) का मौका देने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है, हालांकि अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।
बता दें कि फिलहाल, एक उम्मीदवार JEE एडवांस्ड के लिए दो बार परीक्षा दे सकता है। एक बार 12वीं क्लास की परीक्षा वाले साल में और दूसरी बार उसके अगले साल में।
JEE एडवांस्ड में 3 अटेंप्ट में किन स्टूडेंट्स को होगा फायदा?
IIT कानपुर के डायरेक्टर का कहना है कि यह एक अतिरिक्त प्रयास उन छात्रों की मदद कर सकता है जिन्हें इस परीक्षा के बारे में देर से पता चलता है या जो अपने नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण कोई मौका गंवा देते हैं। लेकिन, इससे छात्र तैयारी में एक और साल बिता सकते हैं, जिसके लिए अक्सर उन्हें अतिरिक्त कोचिंग लेनी पड़ती है और खर्च भी करना पड़ता है।