एक वक्त वामिका गब्बी को लगता था कि शायद वे एक्टिंग के लिए नहीं बनी हैं। लगातार रिजेक्शन मिल रहे थे और अच्छे रोल नहीं मिल रहे थे। मुंबई में करीब 6-7 साल बिताने के बाद भी करियर उस मुकाम पर नहीं पहुंचा था, जिसका उन्होंने सपना देखा था।

एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उनसे कहा गया कि अपने हुनर पर काम करो, क्योंकि तुम्हें कोई हीरोइन नहीं लेगा। इसी बीच नेटफ्लिक्स की दो सीरीज- ‘बाहुबली: बिफोर द बिगिनिंग’ और ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ से जुड़ने का मौका मिला, लेकिन दोनों प्रोजेक्ट पर्दे तक नहीं पहुंच पाए। हालांकि, एक अधूरी सीरीज ने उनके करियर की दिशा बदल दी।

विशाल भारद्वाज की वर्कशॉप ने उन्हें एक्टिंग का नया नजरिया दिया, जबकि विक्रमादित्य मोटवानी की ‘जुबली’ से उन्हें हिंदी दर्शकों के बीच पहचान मिली। आज वामिका बड़े सितारों के साथ फिल्मों और ओटीटी प्रोजेक्ट्स में नजर आ रही हैं।

आज की सक्सेस स्टोरी में वामिका गब्बी के करियर और निजी जिंदगी से जुड़ी खास बातें।


बचपन में कैमरे के सामने आईं, ‘जब वी मेट’ से शुरू हुआ सफर

वामिका गब्बी का जन्म 29 सितंबर 1993 को चंडीगढ़ में हुआ। उनके पिता गोवर्धन गब्बी पंजाबी लेखक हैं। साहित्य और कला के माहौल में पली-बढ़ीं वामिका को बचपन से अभिनय में दिलचस्पी थी। उनके पिता मजाक में उन्हें ड्रामेबाज कहते थे।

2007 में रिलीज इम्तियाज अली की फिल्म ‘जब वी मेट’ वामिका के करियर की शुरुआती फिल्मों में शामिल थी। फिल्म में शाहिद कपूर और करीना कपूर लीड रोल में थे। वामिका ने करीना के किरदार गीत की कजिन का छोटा-सा रोल निभाया था।

सिनेमा एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में वामिका ने बताया था कि ‘जब वी मेट’ की शूटिंग के दौरान वे आठवीं क्लास में थीं। फिल्म के निर्देशक इम्तियाज अली आज भी उन्हें ‘छोटी वाली’ कहकर बुलाते हैं। उन्होंने बताया कि इम्तियाज ने ‘जुबली’ देखकर उनके अभिनय की तारीफ की, तो यह उनके लिए बेहद खास पल था।

पहली फिल्म में छोटा रोल मिलने के बाद वामिका ने अभिनय जारी रखा। वे ‘लव आज कल’ (2009), ‘मौसम’ (2011) और ‘बिट्टू बॉस’ (2012) में नजर आईं। हालांकि, इन फिल्मों से उन्हें करियर को नई ऊंचाई देने वाली पहचान नहीं मिली।

‘तुम्हें कोई हीरोइन नहीं लेगा’, कम उम्र में सुननी पड़ी यह बात

वामिका के शुरुआती करियर का एक किस्सा उनके संघर्ष को दिखाता है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि शुरुआती फिल्मों में से एक की शूटिंग के दौरान उनकी उम्र करीब 16-17 साल थी। पूरी टीम डिनर के लिए बैठी थी। तभी एक शख्स उनके पास आया और कहा- अपने क्राफ्ट पर काम करो, अच्छी एक्टर बनना, क्योंकि तुम्हें कोई हीरोइन तो लेगा नहीं।

कम उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने वाले किसी भी कलाकार के लिए भविष्य को लेकर ऐसी टिप्पणी सुनना आसान नहीं होता।

वामिका की कहानी ऐसे बयानों तक सीमित नहीं है। करियर में कई बार उन्हें अपने काम पर दोबारा विचार करना पड़ा। कभी सही रोल नहीं मिले, तो कभी अच्छे प्रोजेक्ट्स बनने से पहले ही बंद हो गए। कई बार उन्हें लगा कि शायद वे सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही हैं।

इसके बावजूद उन्होंने अभिनय जारी रखा। छोटे रोल से शुरुआत कर अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम किया और फिर हिंदी सिनेमा में लीड रोल हासिल किया।


पंजाबी फिल्मों से पहचान मिली, साउथ सिनेमा में भी आजमाया हुनर

हिंदी फिल्मों में शुरुआती काम के बाद वामिका ने पंजाबी सिनेमा में जगह बनाने की कोशिश की। 2013 में रिलीज पंजाबी फिल्म ‘तू मेरा 22 मैं तेरा 22’ में वे नजर आईं। फिल्म में उनके साथ अमरिंदर गिल और यो यो हनी सिंह थे। इसके बाद उन्होंने पंजाबी फिल्मों में लगातार काम किया।

वामिका ने ‘इश्क ब्रांडी’, ‘निका जैलदार 2’ और अन्य पंजाबी फिल्मों से दर्शकों के बीच पहचान मजबूत की। उन्होंने तमिल, तेलुगु और मलयालम सिनेमा में भी काम किया। तमिल फिल्म ‘मलाई नेरथु मयक्कम’ और मलयालम फिल्म ‘गोधा’ उनके क्षेत्रीय सिनेमा के सफर की अहम फिल्में हैं।

अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम करने से वामिका को कई तरह के किरदार निभाने का अनुभव मिला। हालांकि, कई साल काम करने के बाद भी हिंदी सिनेमा में उन्हें मनचाही पहचान नहीं मिली।

द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में वामिका ने बताया था कि 2019 तक वे मुंबई में करीब सात साल बिता चुकी थीं। फिर भी उन्हें मनचाहा काम नहीं मिल रहा था। वे अपने अभिनय से संतुष्ट नहीं थीं और उन्हें लगने लगा था कि शायद कुछ और करना चाहिए।

2019 में एक्टिंग छोड़ने का मन बनाया, फिर मिला विशाल भारद्वाज का प्रोजेक्ट

वामिका के करियर का अहम मोड़ 2019 में आया। उस साल उनकी पांच पंजाबी फिल्में रिलीज हुई थीं, जिनमें से तीन सफल रही थीं। इसके बावजूद वे अपने काम से खुश नहीं थीं।

फिल्मफेयर को नवंबर 2023 में दिए इंटरव्यू में वामिका ने बताया कि उस दौर में वे करियर को लेकर उलझन में थीं। उनके पिता हमेशा कहते थे कि वही काम करना चाहिए, जिसमें खुशी मिले। वामिका ने सोचा था कि कुछ और फिल्में करके पैसे कमाएंगी और फिर दुनिया घूमने निकल जाएंगी।

इसी दौर में उन्हें फिल्ममेकर विशाल भारद्वाज के प्रोजेक्ट ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ के लिए ऑडिशन देने का मौका मिला। यह प्रोजेक्ट लेखक सलमान रुश्दी के चर्चित उपन्यास पर आधारित था।

वामिका के मुताबिक, उन्होंने शुरुआत में ऑडिशन को गंभीरता से नहीं लिया था, क्योंकि लगातार रिजेक्शन के बाद उन्हें इस बार भी चयन की उम्मीद नहीं थी। लेकिन किरदार के लिए सीन करते हुए उन्हें मजा आया। वे सहज महसूस कर रही थीं और यह अनुभव उन्हें पिछले ऑडिशन से अलग लगा।

इसके बाद उन्हें बताया गया कि चुने गए कलाकारों को एक्टिंग कोच अतुल मोंगिया के साथ तीन दिन की वर्कशॉप करनी होगी। वामिका उसमें शामिल हुईं। उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह अनुभव अभिनय और करियर को लेकर उनका नजरिया बदल देगा।


तीन दिन की वर्कशॉप से सीखा- बेहतर एक्टर बनने के लिए खुद को समझना जरूरी

वामिका के लिए ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ का ऑडिशन बड़े प्रोजेक्ट में काम पाने के साथ-साथ अभिनय को नए सिरे से समझने का मौका भी था। उन्होंने बताया था कि वर्कशॉप के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि एक्टिंग का मतलब खुद को छिपाना या किसी दूसरे की नकल करना नहीं है। अभिनय बेहतर बनाने के लिए पहले खुद को समझना जरूरी है। जब इंसान खुद के प्रति संवेदनशील, स्वीकार करने वाला और कम जजमेंटल होता है, तो वह अपने किरदार को भी बेहतर समझ पाता है।

इस अनुभव से वामिका का अभिनय के प्रति उत्साह लौटा। जिस काम को छोड़ने के बारे में वे सोच रही थीं, उसी में उन्हें नई खुशी मिलने लगी।

विशाल भारद्वाज ने भी उनके टैलेंट पर भरोसा जताया। फिल्मफेयर से बातचीत में वामिका ने बताया था कि प्लेटफॉर्म लोकप्रिय चेहरे की तलाश में था, लेकिन विशाल भारद्वाज उन्हें चुनना चाहते थे। वामिका के मुताबिक, उन्होंने उनके टैलेंट पर भरोसा जताते हुए कहा था कि इस लड़की में कुछ खास है।

किसी अनुभवी फिल्ममेकर का भरोसा एक युवा कलाकार के लिए बड़ी बात होती है। वामिका के लिए यह सिर्फ रोल मिलने की खबर नहीं, बल्कि अपने अभिनय के दम पर आगे बढ़ने का भरोसा भी था।

‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ बंद हुई, लेकिन वामिका के लिए नए रास्ते खुले

‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ में वामिका को पार्वती के किरदार के लिए चुना गया था। वे प्रोजेक्ट की तैयारी कर रही थीं, लेकिन शूटिंग शुरू होने से करीब एक महीने पहले इसे रोक दिया गया।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वामिका मार्च 2019 में ऑडिशन के बाद इस प्रोजेक्ट के लिए शॉर्टलिस्ट हुई थीं। सीरीज नहीं बन पाई, लेकिन ऑडिशन और वर्कशॉप ने उनके करियर को नई दिशा दी।

वामिका ने कई इंटरव्यू में बताया कि इस प्रोजेक्ट के जरिए उनका परिचय विशाल भारद्वाज से हुआ और इंडस्ट्री में उनके काम की चर्चा शुरू हुई। बाद में उन्हें विशाल भारद्वाज की फिल्मों और सीरीज में अहम भूमिकाएं मिलीं।

जिस प्रोजेक्ट के बंद होने से उन्हें निराशा हो सकती थी, वही भविष्य के अवसरों की शुरुआत बना। उनके करियर के इस मोड़ पर फिल्म या सीरीज के रिलीज होने से ज्यादा अहम उससे मिला अनुभव और इंडस्ट्री में बने संपर्क साबित हुए।

‘बाहुबली: बिफोर द बिगिनिंग’ में युवा शिवगामी बनने की तैयारी थी

वामिका के करियर का एक और अधूरा प्रोजेक्ट नेटफ्लिक्स की ‘बाहुबली: बिफोर द बिगिनिंग’ था। यह एस.एस. राजामौली की ‘बाहुबली’ फिल्मों से पहले की कहानी पर आधारित प्रस्तावित सीरीज थी।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वामिका को इसमें युवा शिवगामी की भूमिका के लिए चुना गया था। ‘बाहुबली’ की कहानी में शिवगामी का किरदार अहम है। फिल्मों में यह भूमिका राम्या कृष्णन ने निभाई थी।

इस भूमिका के लिए वामिका ने तलवारबाजी की ट्रेनिंग ली थी। दिसंबर 2023 में प्रकाशित इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि निर्देशक बदलते रहे, लेकिन वे तलवारबाजी का अभ्यास करती रहीं। उन्हें उम्मीद थी कि प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा, लेकिन आखिरकार इसे बंद कर दिया गया।

प्रोजेक्ट बंद होने की वजहों पर अलग-अलग रिपोर्टें आईं, लेकिन किसी एक कारण की निर्णायक पुष्टि नहीं हुई। वामिका इसकी तैयारी कर रही थीं, लेकिन दर्शक उन्हें इस भूमिका में नहीं देख सके।

यह उनके लिए एक और ऐसा अवसर था, जिसमें काफी तैयारी के बावजूद अंतिम नतीजा उनके हाथ में नहीं था। फिर भी उन्होंने अभिनय और नए किरदारों की तलाश जारी रखी।


‘जुबली’ में नीलोफर बनकर बदली किस्मत, पहले इस रोल के लिए हुई थीं रिजेक्ट

वामिका को हिंदी दर्शकों के बीच पहचान 2023 में आई विक्रमादित्य मोटवानी की वेब सीरीज ‘जुबली’ से मिली। इस पीरियड ड्रामा में उन्होंने नीलोफर कुरैशी का किरदार निभाया, जो अभिनेत्री बनने और फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए संघर्ष करती है।

वामिका को शुरुआत में इस भूमिका के लिए रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था। उन्होंने बताया था कि ऑडिशन अच्छा गया था, लेकिन निर्देशक विक्रमादित्य मोटवानी उनके चयन को लेकर आश्वस्त नहीं थे।

बाद में वामिका के इंस्टाग्राम वीडियो और अन्य कंटेंट देखकर उन्हें लगा कि उसमें नीलोफर के किरदार के लिए जरूरी चंचलता और अलग अंदाज है। इस तरह सोशल मीडिया पर वामिका का व्यक्तित्व भी भूमिका दिलाने में मददगार बना।

नीलोफर महत्वाकांक्षी है। वह फिल्मी दुनिया में आगे बढ़ना चाहती है, लेकिन उसका सफर आसान नहीं है। वह ऑडिशन देती है, मौके तलाशती है और प्रतिभा के दम पर आगे बढ़ने की कोशिश करती है।

वामिका ने इस किरदार को सिर्फ महत्वाकांक्षी महिला के रूप में नहीं देखा, बल्कि उसकी परिस्थितियों और भावनाओं को समझने की कोशिश की। उनकी परफॉर्मेंस को दर्शकों और समीक्षकों ने सराहा।

द टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में वामिका ने बताया था कि ‘जुबली’ के बाद अपने नाम और अभिनय की तारीफ सुनना उनके लिए अविश्वसनीय अनुभव था। सालों के काम के बाद आखिरकार उन्हें उस पहचान मिलने लगी, जिसका इंतजार था।


‘खुफिया’, ‘चार्ली चोपड़ा’ और ‘मॉडर्न लव’ में दिखाए अभिनय के अलग-अलग रंग

‘जुबली’ की सफलता के बाद वामिका को कई नए अवसर मिले। विशाल भारद्वाज की नेटफ्लिक्स फिल्म ‘खुफिया’ में उन्होंने चारु का किरदार निभाया। फिल्म में उनके साथ तब्बू और अली फजल भी थे।

‘खुफिया’ में उनका किरदार ‘जुबली’ की नीलोफर से अलग था। विशाल भारद्वाज की सीरीज ‘चार्ली चोपड़ा एंड द मिस्ट्री ऑफ सोलांग वैली’ में वे जासूस की भूमिका में नजर आईं। यह अगाथा क्रिस्टी के उपन्यास ‘द सिट्टाफोर्ड मिस्ट्री’ से प्रेरित थी।

इससे पहले वे ‘मॉडर्न लव मुंबई’ और ‘मॉडर्न लव चेन्नई’ जैसे एंथोलॉजी प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रही थीं। इनसे उन्हें अलग-अलग कहानियों और किरदारों में काम करने का अवसर मिला।

वामिका ने विशाल भारद्वाज के साथ काम करने के अनुभव को खास बताया था। उन्होंने कहा था कि इससे उन्हें जीवन और रिश्तों को समझने का नया नजरिया मिला। दोनों ओशो के विचारों पर भी बातचीत करते थे।

वामिका का विशाल भारद्वाज के साथ जुड़ाव सिर्फ काम तक सीमित नहीं रहा। ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ से शुरू हुआ यह रिश्ता आगे कई प्रोजेक्ट्स तक पहुंचा और उनके करियर का अहम हिस्सा बना।

कम इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के कारण भी झेलना पड़ा रिजेक्शन

वामिका का संघर्ष सिर्फ अच्छे किरदार न मिलने तक सीमित नहीं था। उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की लोकप्रियता मापने के तरीकों का भी सामना करना पड़ा।

एक इंटरव्यू में वामिका ने बताया था कि कुछ फिल्ममेकर्स ने उन्हें इसलिए रिजेक्ट किया, क्योंकि वे ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स वाली अभिनेत्री चाहते थे। यह अनुभव दिखाता है कि कास्टिंग में कलाकार की प्रतिभा के साथ सोशल मीडिया लोकप्रियता को भी महत्व दिया जाता है।

वामिका के मामले में दिलचस्प यह है कि बाद में सोशल मीडिया वीडियो ने उन्हें ‘जुबली’ में नीलोफर का किरदार दिलाने में मदद की। यानी जिस माध्यम के कारण उन्हें कभी रिजेक्शन मिला, उसी के कंटेंट ने अहम अवसर भी दिलाया।

यह विरोधाभास उनके करियर को दिलचस्प बनाता है। सोशल मीडिया न तो उनके लिए सफलता की गारंटी रहा और न ही सिर्फ रिजेक्शन की वजह। आखिरकार निर्देशक को उनके व्यक्तित्व और अभिनय में अपने किरदार की झलक दिखाई दी।