आजकल पेट की चर्बी कम करने और फिट रहने के लिए प्लैंक एक्सरसाइज काफी लोकप्रिय हो रही है। यह ऐसी एक्सरसाइज है, जिसमें शरीर को पुश-अप जैसी स्थिति में स्थिर रखा जाता है और पेट, पीठ तथा शरीर के बीच वाले हिस्से की मांसपेशियों को सक्रिय रखना पड़ता है। इसे करने के लिए किसी महंगे उपकरण की जरूरत नहीं होती और इसे घर पर भी किया जा सकता है। लेकिन क्या रोजाना कुछ मिनट प्लैंक करने से पेट की चर्बी पिघल सकती है? इसका जवाब है, सिर्फ प्लैंक करने से बैली फैट कम होने की गारंटी नहीं है। यह एक्सरसाइज कोर मसल्स को मजबूत बनाने में मदद करती है, लेकिन शरीर की चर्बी घटाने के लिए संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और कैलोरी संतुलन भी महत्वपूर्ण हैं।

प्लैंक एक्सरसाइज शरीर में किन मसल्स को एक्टिवेट करती है?

प्लैंक एक आइसोमैट्रिक एक्सरसाइज है। इसका मतलब है कि एक्सरसाइज के दौरान मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं, लेकिन शरीर में बार-बार मूवमेंट नहीं किया जाता। सही तरीके से प्लैंक करने पर पेट की मांसपेशियों, पीठ, कूल्हों और शरीर को स्थिर रखने वाली मांसपेशियों को काम करना पड़ता है।
इस एक्सरसाइज में मुख्य रूप से ये मांसपेशियां सक्रिय होती हैं:

  • पेट की मसल्स : पेट की मांसपेशियां शरीर को स्थिर रखने में मदद करती हैं।

  • पेट की अंदरुनी मांसपेशी: पेट की गहरी मांसपेशी (Transverse Abdominis), जो धड़ को स्थिर रखने में भूमिका निभाती है।

  • ऑब्लिक्यूस (Obliques): पेट के दोनों किनारों की मांसपेशियां, जो धड़ को स्थिर रखने में मदद करती हैं।

  • पीठ की मांसपेशियां: पीठ की मांसपेशियां शरीर की मुद्रा बनाए रखने में योगदान देती हैं।

  • ग्लूट्स और कंधे की मांसपेशियां: कूल्हों और कंधों की मांसपेशियां शरीर को सही स्थिति में बनाए रखने में मदद करती हैं।

हॉर्वर्ड हेल्थ के अनुसार, मजबूत कोर मसल्स शरीर को स्थिर रखने और रोजमर्रा के कामों को आसानी से करने में मदद करती हैं। इसलिए प्लैंक का फायदा केवल पेट की मांसपेशियों तक सीमित नहीं है।

क्या सिर्फ प्लैंक करने से बैली फैट या मोटापा कम हो सकता है?


मैयोक्लीनिक के अनुसार अगर आपका लक्ष्य पेट की चर्बी कम करना है, तो यह समझना जरूरी है कि प्लैंक एक्सरसाइज पेट की मांसपेशियों को मजबूत करती है, लेकिन यह सीधे पेट की चर्बी को खत्म नहीं करती। शरीर के किसी एक हिस्से की एक्सरसाइज करके केवल उसी हिस्से की चर्बी घटाने को स्पॉट रिडक्शन (Spot Reduction) कहा जाता है। इसके लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि सिर्फ प्लैंक करने से पेट की चर्बी चुनिंदा रूप से कम हो जाती है। पेट के आसपास जमा चर्बी कम करने के लिए पूरे शरीर की चर्बी घटाने पर ध्यान देना होता है। इसके लिए संतुलित आहार, नियमित वॉकिंग या अन्य एरोबिक्स एक्सरसाइज और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का संयोजन ज्यादा उपयोगी है।

सीडीसी के अनुसार इसका मतलब यह नहीं है कि वजन घटाने की कोशिश करने वालों के लिए प्लैंक बेकार है। जब आप प्लैंक के साथ नियमित वॉकिंग, साइकिलिंग या दूसरी शारीरिक गतिविधियां करते हैं और खानपान में संतुलन रखते हैं, तो यह आपकी फिटनेस दिनचर्या का उपयोगी हिस्सा बन सकती है। मोटापा कम करने के लिए किसी एक एक्सरसाइज पर निर्भर रहने के बजाय ऐसी दिनचर्या अपनाएं, जिसे लंबे समय तक जारी रखा जा सके।

प्लैंक का कैलोरी बर्न और वेट लॉस में कितनी भूमिका निभाता है?

प्लैंक करते समय शरीर की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं और ऊर्जा खर्च होती है। हालांकि, प्लैंक में शरीर स्थिर रहता है, इसलिए इससे खर्च होने वाली कैलोरी आमतौर पर तेज चलने, दौड़ने या साइकिल चलाने जैसी लगातार मूवमेंट वाली गतिविधियों की तुलना में सीमित होती है। कितनी कैलोरी खर्च होगी, यह व्यक्ति के वजन, एक्सरसाइज की अवधि, तकनीक और शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है।

इसलिए केवल प्लैंक की अवधि बढ़ाते जाना वजन घटाने की सबसे प्रभावी रणनीति नहीं है। वजन कम करने के लिए शरीर द्वारा खर्च की गई कैलोरी और भोजन से मिलने वाली कैलोरी के बीच संतुलन महत्वपूर्ण है। सीडीसी के अनुसार, शारीरिक गतिविधि के साथ भोजन से मिलने वाली कैलोरी को संतुलित करने से कैलोरी डेफिसिट बनाने में मदद मिलती है, जो वजन घटाने के लिए जरूरी है।

शुरुआत में प्लैंक कितनी देर से शुरू करना चाहिए?


प्लैंक करने से पोश्चर सही होने, फिटनेस में सुधार, रोजाना के काम करने में मदद और शरीर का बैलेंस बेहतर होता है।

अगर आप पहली बार प्लैंक कर रहे हैं, तो शुरुआत में ज्यादा देर तक शरीर को स्थिर रखने की कोशिश करने के बजाय सही तकनीक पर ध्यान दें। नेशनल एकेडमी ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिनके अनुसार शुरुआती लोग अपनी क्षमता के अनुसार 10–15 सेकंड के छोटे सेट से शुरुआत कर सकते हैं। यदि शरीर की स्थिति सही बनी रहती है और दर्द नहीं होता, तो धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है। हर व्यक्ति के लिए एक ही अवधि जरूरी नहीं है।

प्लैंक करने का सही तरीका

  1. योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं और दोनों कोहनियां कंधों के ठीक नीचे रखें।

  2. पैरों के पंजों को जमीन पर टिकाकर शरीर को ऊपर उठाएं।

  3. सिर से एड़ियों तक शरीर को लगभग सीधी रेखा में रखें।

  4. पेट की मांसपेशियों को हल्का टाइट रखें और कूल्हों को न ज्यादा ऊपर उठाएं, न नीचे झुकने दें।

  5. सामान्य तरीके से सांस लेते रहें। सांस रोककर प्लैंक न करें।

  6. जब सही मुद्रा बनाए रखना मुश्किल होने लगे, तो धीरे-धीरे घुटनों को जमीन पर लाकर आराम करें।

शुरुआती लोगों के लिए टिप: यदि सामान्य प्लैंक मुश्किल लगे, तो Wall Plank या घुटनों को जमीन पर रखकर Modified Plank से शुरुआत की जा सकती है। जैसे-जैसे ताकत और नियंत्रण बेहतर हो, एक्सरसाइज को कठिन बनाया जा सकता है।

सही तकनीक से व्यायाम करना केवल लंबे समय तक प्लैंक करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। यदि कमर में दर्द होने लगे, तो एक्सरसाइज रोक दें और जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर से सलाह लें।

किन लोगों को प्लैंक करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए

डॉक्टर के मुताबिक अनियंत्रित हाई बीपी, हृदय रोग, डायबिटिक रेटिनोपैथी (इसमें तनाव मायने रखता है), हर्निया, हाल ही में पेट की सर्जरी, गर्भावस्था या प्रसवोत्तर अवस्था, कलाई, कंधे या पीठ की समस्याएं और अत्यधिक मोटापे से ग्रस्त लोगों को प्लैंक व्यायाम में कलाई और कंधों पर जोर पड़ सकता है, इसलिए झुकाव या घुटने टेकने वाले व्यायाम बेहतर होते हैं।

प्लैंक एक्सरसाइज पेट और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने, शरीर की स्टेबिलिटी बेहतर बनाने और फिटनेस रूटीन को प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, सिर्फ प्लैंक करने से पेट की चर्बी या मोटापा कम होने की गारंटी नहीं है। वजन घटाने के लिए संतुलित आहार, नियमित एरोबिक्स एक्सरसाइज और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का संयोजन जरूरी है। शुरुआत में 10–15 सेकंड के छोटे सेट से शुरू करें, सही तकनीक अपनाएं और धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ाएं। याद रखें, नियमितता और सही तरीका किसी भी एक्सरसाइज के फायदे पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।