काशी में शुक्रवार को धनतेरस पर मां अन्नपूर्णा अपने स्वर्णमयी स्वरूप में भक्तों को दर्शन दे रही हैं। मंदिर के बाहर 2 किमी लाइन लगी है। श्रद्धालु आधी से रात से मंदिर के बाहर खड़े हैं।

दर्शन के बाद भक्तों को प्रसाद में सिक्के और लावा दिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे घर-परिवार में धन की कमी नहीं आती। सुबह 11 बजे तक 60 हजार भक्तों ने मां के दर्शन कर लिए हैं।

इससे पहले, सुबह 4 बजे मां का शृंगार किया गया। फिर विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। अगले पांच दिनों तक श्रद्धालु मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के साथ भूमि देवी, मां लक्ष्मी और रजत महादेव के दर्शन कर सकेंगे।

5 दिनों तक श्रद्धालुओं को मां के दर्शन के साथ खजाना प्रसाद भी दिया जाएगा। अभिजीत मुहूर्त में विशेष पूजन और आरती के बाद मां के खजाने के साथ 21 किलो के रजत खजाने की भी पूजा-अर्चना की जाएगी।

पुलिस प्रशासन द्वारा दो पहिया वाहनों का संचालन भी मंदिर मार्ग पर शुरू कर दिया गया है। सुबह 11 तक 60 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए थे।


अंजली ने बताया- मान्यता है कि धनतेरस के दिन माता के दर्शन करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। धनतेरस से दिवाली तक तीन दिनों के लिए मंदिर में खजाना और सिक्का वितरित किया जाता है। मान्यता है कि सिक्के को घर लाकर तिजोरी या पैसे रखने की जगह पर रखने से धन संबंधी परेशानियां दूर होती हैं और पूरे साल बरकत बनी रहती है। वहीं, प्रसाद में मिलने वाले चावल को घर के अनाज में मिलाने से पूरे साल अन्न की कमी नहीं होती। लोग कल रात से ही लाइन में लगे हैं। हम भी रात 2 बजे से दर्शन के लिए आए थे। अब माता रानी के दर्शन हो पाए हैं।


श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए किसी भी वाहन को मंदिर की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। अब तक करीब 45 हजार श्रद्धालु माता रानी के दर्शन कर चुके हैं।


मां के दर्शन करने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में खजाना दिया जा रहा है। खजाने में श्रद्धालुओं को सिक्के और लवा दिया जा रहा है।


जो लोग चलने में असमर्थ हैं। दिव्यांग हैं। ऐसे लोगों के लिए स्पेशल व्यवस्था की गई है। उनको व्हीलचेयर के माध्यम से मंदिर तक ले जाया जा रहा है।


मां के दर्शन करने 8 साल का एक बच्चा भी परिवार के साथ पहुंचा। उसने बताया कि रात 2 बजे से लाइन में लगा था। करीब 7 घंटे बाद उसे माता के दर्शन हुए। खजाने में सिक्का और लवा मिला।


हर्षित पांडे ने बताया कि आज के दिन को लेकर मुझमें काफी उत्साह था। मैं सुबह 5 बजे से ही दर्शन के लिए लाइन में लग गया था। मुझे यहां से सिक्का और लावा लेना था। मान्यता है कि सिक्के और लावे को घर में रखने से परिवार में धन-धान्य की कमी नहीं होती और सुख-समृद्धि बनी रहती है। करीब तीन घंटे इंतजार के बाद मैंने माता रानी के दर्शन किए। खजाने में मुझे लावा और पांच सिक्के मिले हैं। इसके साथ ही पोस्टर और रसीद भी ली है। प्रसाद वितरण के समय मुझे यहां दोबारा बुलाया जाएगा।


जौनपुर के संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि गुरुवार को ही हम यहां आ गए थे। दोपहर 12 बजे से दर्शन के लिए लाइन में लग गए थे। पिछले साल भी माता रानी के दर्शन करने आए थे। माता का आशीर्वाद रहा और सब कुछ अच्छा रहा। खजाना मिलने से हमें काफी लाभ हुआ। इसी वजह से इस बार अपने भाई को भी साथ लेकर आए हैं।


बांस फाटक गली से श्रद्धालुओं को मंदिर की तरफ भेजा जा रहा है। श्रद्धालु एकल मार्ग से मंदिर तक पहुंच रहे हैं और दर्शन कर रहे हैं।


बड़हलगंज के रहने वाले राजकुमार गुप्ता ने बताया कि आज से माता रानी का खजाना मिलना शुरू हो गया है। हमने भी मां के दर्शन कर लिए हैं। दर्शन के लिए करीब दो घंटे इंतजार करना पड़ा। प्रसाद के रूप में माता रानी का खजाना मिला है। मान्यता है कि जिसकी जैसी श्रद्धा होती है, उसे वैसा ही फल मिलता है। अब इस खजाने को घर ले जाकर पूजा स्थान पर रखेंगे और नियमित रूप से पूजा-अर्चना करेंगे।


डीसीपी गौरव बंसवाल ने बताया कि 10 तारीख तक दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी रहेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। एकल मार्ग से श्रद्धालुओं को दर्शन कराया जा रहा है, ताकि किसी को अव्यवस्था का सामना न करना पड़े।


मां के दर्शन के लिए अन्नपूर्णा मंदिर के बाहर करीब 2 किलोमीटर लंबी लाइन लगी हुई है। भक्त सुबह से ही लाइन में लग गए थे।


धनतेरस पर मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के लिए सुबह 4 बजे विशेष पूजा-अर्चना और शृंगार शुरू हुआ। सुबह पौने 5 बजे तक पूजन और आरती संपन्न हुई। इसके बाद सुबह 5 बजे मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस बार निर्धारित समय से एक घंटे पहले ही दर्शन शुरू करा दिए गए।

अगले पांच दिनों तक श्रद्धालु मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के साथ भूमि देवी, मां लक्ष्मी और रजत महादेव के भी दर्शन कर सकेंगे।

वहीं, अभिजीत मुहूर्त में विशेष पूजन और आरती के बाद मां के खजाने के साथ 21 किलो के रजत खजाने की भी पूजा-अर्चना की जाएगी।


बांसफाटक से प्रवेश, कालिका गली से होगी निकासी


श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए हैं। सुरक्षा के लिए मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई गई है। कंट्रोल रूम से पूरे परिसर की निगरानी होगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेडिकल टीम और सेवादार भी तैनात रहेंगे।

  • बांसफाटक से गेट नंबर एक स्थित ढुंढिराज मार्ग से प्रवेश मिलेगा।

  • अस्थायी सीढ़ियों से होते हुए श्रद्धालु मां के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन करेंगे।

  • दर्शन के बाद कालिका गली से निकासी होगी।


10 नवंबर तक मिलेगा मां का खजाना प्रसाद


मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन और खजाना प्रसाद वितरण की व्यवस्था 10 नवंबर को अन्नकूट महापर्व की शयन आरती तक जारी रहेगी। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित रास्तों का पालन करने और सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है।


अन्नकूट पर बाबा विश्वनाथ को चढ़ेगा छप्पन भोग


10 नवंबर को अन्नकूट महापर्व पर काशी विश्वनाथ मंदिर में भी विशेष आयोजन होगा। मध्याह्न भोग आरती के दौरान भगवान विश्वेश्वर को छप्पन भोग अर्पित किए जाएंगे। इसमें मिठाइयां, फल, नमकीन, मेवे और पारंपरिक पकवान शामिल होंगे।

इस अवसर पर भगवान शिव परिवार की चल प्रतिमा को गर्भगृह में विराजमान कर दिव्य शृंगार किया जाएगा। लड्डुओं से निर्मित भव्य शिवालय भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसके दर्शन गर्भगृह के पश्चिमी द्वार के पास वैकुंठ महादेव प्रांगण में होंगे।

मध्याह्न भोग आरती के बाद श्रद्धालु गर्भगृह के बाहर से शिव परिवार की झांकी के दर्शन कर सकेंगे। अन्नकूट के दिन नियमित शयन आरती गर्भगृह के दक्षिणी द्वार से संपन्न होगी।