रायपुर, 6 हजार करोड़ के महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को CBI ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लेकर आई है। सोमवार को उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया।

कोर्ट ने 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड की मांग पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। CBI ने चंद्राकर को छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित स्पेशल कोर्ट में पेश करने के लिए ट्रांजिट रिमांड मांगी है।

कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड मिलती है तो CBI की टीम उसे आज शाम तक रायपुर लेकर आएगी। यहां उसे स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा।

वहीं, चंद्राकर के वकील ने CBI की मांग का विरोध करते हुए कहा कि सौरभ को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के मामले में ओमान से प्रत्यर्पित किया गया है, न कि CBI के मामले में।

बता दें कि महादेव सट्टा ऐप से जुड़े मामलों की जांच CBI कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले से जुड़ी 13 FIR जांच के लिए CBI को सौंपी थीं। इनमें से 2 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।

इसके अलावा ED भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है और सौरभ के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी पर CBI को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रोटेक्शन मनी किन-किन लोगों तक पहुंचती थी, इसका बड़ा खुलासा होगा।

116 दिन बाद ओमान से भारत लाया गया

CBI के मुताबिक, महादेव सट्टा नेटवर्क की जांच शुरू होने के बाद से ही सौरभ चंद्राकर फरार था। वह 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था।

गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और UAE से ओमान पहुंच गया।

दैनिक भास्कर को उसके कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट की जानकारी मिली थी। इसमें उसकी फोटो थी, लेकिन नाम ‘अजंता मेंडिस’ लिखा था, जो श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस से मिलता-जुलता है।

पासपोर्ट में जन्मतिथि भी दूसरे दस्तावेजों से अलग थी। खुफिया जानकारी और रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर 8 जुलाई 2026 को ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।

इसके बाद CBI और ED ने भारत सरकार के जरिए ओमान को प्रत्यर्पण का औपचारिक प्रस्ताव भेजा और सबूत सौंपे।

भारत सरकार की एजेंसियों, इंटरपोल और ओमान के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद प्रत्यर्पण को मंजूरी मिली। इसके बाद CBI की टीम मस्कट पहुंची और 1 नवंबर को उसे भारत लेकर आई।

CBI, ED और इंटरपोल ने मिलकर तैयार की वापसी की प्रक्रिया

सौरभ को भारत लाने के लिए CBI और ED ने ओमान के अधिकारियों को अपने मामलों से जुड़े सबूत सौंपे। इस प्रक्रिया में इंटरपोल और रॉयल ओमान पुलिस ने भी सहयोग किया।

प्रत्यर्पण की मंजूरी मिलने के बाद CBI टीम मस्कट पहुंची और सौरभ को हिरासत में लेकर भारत लाई। CBI ने सहयोग के लिए ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया।

भारत आने के बाद अब क्या होगा?

सौरभ के खिलाफ CBI दो मामलों में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। वहीं, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी उसके खिलाफ चार्जशीट दायर की है।

अब दोनों एजेंसियां पहले से जुटाए गए सबूतों के आधार पर उससे पूछताछ कर सकती हैं। पहले CBI उससे पूछताछ करेगी। इसके बाद ED भी रिमांड लेकर उससे सवाल-जवाब कर सकती है।

भारत आने से पहले सौरभ ने जान का खतरा बताया था

ओमान में हिरासत के दौरान सौरभ चंद्राकर ने भारत की जेल में अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई थी। उसने अपने परिवार की सुरक्षा की मांग भी की थी।

सौरभ का दावा था कि महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली लोग उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उसने पूछताछ के दौरान सुरक्षा देने और बिना दबाव के अपना पक्ष रखने का मौका देने की मांग की थी।

सट्टा नेटवर्क के राज खोलने की बात कही थी

सौरभ चंद्राकर ने ओमान में भारतीय जांच एजेंसियों को महादेव सट्टा नेटवर्क के राजनीतिक कनेक्शन, पैसों के लेन-देन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों की जानकारी देने की बात कही थी।

उसने भारत आकर जांच एजेंसियों और कोर्ट में बयान देने की तैयारी जताई थी। इसके बदले उसने अपनी और परिवार की सुरक्षा मांगी थी। साथ ही नेटवर्क से जुड़े लोगों से अलग रखने की मांग की थी, ताकि बिना दबाव के बयान दे सके।

देशभर में फैला था सट्टेबाजी का नेटवर्क

CBI की जांच में सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में शामिल था। इसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। इस प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और दूसरे खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था।

इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी की तरह पैनल और ब्रांच बनाई गई थीं। इनके जरिए लोगों को सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था और उनसे पैसे जमा कराए जाते थे।

हवाला से विदेश भेजे जाते थे पैसे

जांच एजेंसी के मुताबिक, सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम कई बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इन खातों के जरिए अलग-अलग लेनदेन कर पैसे को छिपाया जाता था और हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था।

CBI की जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क को बिना रुकावट चलाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दी जाती थी।

CBI ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, IPC की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं के साथ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की है। वहीं ED भारत और विदेश में कई संपत्तियां अटैच कर चुकी है।