राज्यसभा के लिए तीन विधायकों का जुगाड़ का संकट तो नहीं!
कहीं ऐसा तो नहीं कि चिराग पासवान को तीन विधायकों के जुगाड़ का संकट था। चिराग पासवान की पार्टी के 19 विधायक हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह थी कि पांचवीं सीट के लिए राजद उम्मीदवार उतारेगा और एआईएमआईएम से बात हो रही है। ऐसे में तीन विधायक का जुगाड़ कैसे करते? जुगाड़ को लेकर एआईएमआईएम और कांग्रेस के विधायक ही टारगेट किए जा सकते थे। फिर तीन विधायक कहां से लाते? दलित राजनीति को देखते बसपा के एक विधायक का समर्थन ऐसे भी नहीं मिलता। तो ले देकर एक आईपी गुप्ता बचते। राजद के उम्मीदवार उतारने के कारण यह बहुत मुश्किल होता।चिराग पासवान ने क्यों चुना एग्जिट का रास्ता?
एक संभावना थी कि वादा को याद कर जिद्द करते तो किसी धनकुबेर को चुनावी जंग में उतर सकते थे। ऐसे में इन पर टिकट बेचने का आरोप लगता। दूसरी तरफ उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी झेलनी पड़ती। पहले से जीतन राम मांझी से तकरार चल ही रहा है। ऐसे में चिराग पासवान ने एग्जिट का ही रास्ता चुना।चिराग के आड़े आ रहे जीतन राम मांझी?
एक संकट यह भी था कि राज्यसभा की एक सीट की चाहत हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेक्युलर को भी थी। हम के संस्थापक अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने तो अपनी तरफ से राज्यसभा की एक सीट की डिमांड कर दी थी। उनकी पार्टी के पांच विधानसभा सदस्य और एक विधान पार्षद हैं। इनमें इमामगंज विधानसभा से दीपा कुमारी (मांझी) बाराचट्टी विधानसभा से ज्योति देवी, अतरी विधानसभा से रोमित कुमार, सिकंदरा विधानसभा से प्रफुल्ल कुमार मांझी और कुटुम्बा विधानसभा से ललन राम विधायक हैं।ऐसे में अगर चिराग पासवान एक सीट ले भी लेते तो हम के पांच विधायकों का साथ नहीं मिलता तो और भी किरकिरी हो जाती। यह संभावना इसलिए भी बढ़ जाती है कि राज्यसभा चुनाव में कोई व्हिप जारी नहीं होता है। ऐसे में 8 विधायकों का जुगाड़ चिराग के लिए एक कठिन डगर होता।

